Jab Rida Sar se chini, Main sada deti rahi – Tu Na Aya Ghazi

Noha

Haye Abbas, Haye Abbas
Aale Imran Kahan, Aur Zindan Kahan, Lye Behan Qaid Hui,
Tu Na Aya Ghazi

Jab Rida Sar se chini, Main sada deti rahi
Tu Na Aya Ghazi

● Aa gyi Shaam e Alam, Lut Gaye ahle Haram
Rait Pr Jalti Hui, Ho gaya Thanda Alam
Pursa Denay Ke Liye, Mujh se Milne Ke Liye
Aa gye Baba Ali(as), Tu Na Aya Ghazi

● Dhoop Main Tu Tha Shajar, Tujhse Aabad Tha Ghar
Hai Barehna Mera Sar, Kya Nahi Tujh Ko Khabar
Aye Alamdar e Wafa, is Behan Ko Ba Khuda
Tujhse Dharas Thi Bari, Tu Na Aya Ghazi

● Kya Kahun Sher Mere, Be Rida Hum Ko Liye
Ye Musalman Sare, Shehr Dar Shehr Gaye
Khilqate Kufa Kabhi, Khilqate Sham Kabhi
Baraha Hum Pe Hansi, Tu Na Aya Ghazi

● Kitni Bebas Thi Behan, Aye Shehanshah e Wafa
Naam Le Le Ke Mera, Jab Ye Zaalim Ne Kaha
Naz Tha Jis Pe Tujhe, Ab Bulao Na Use
Aur Main Roti Rahi, Tu Na Aya Ghazi

● Hum Ko Pani Na Mile Teri Khushboo To Rahe
Tere Baazu Na Katain, Chahe Mashkeeza Chide
Ye Magar Ho Na Saka Tere Baazu Hain Juda
Mujh Pe Hai Tashna Labi, Tu Na Aya Ghazi

● Kya Sakina Se Kahun, Aye Mere Dil Ke Sukoon
Haye Pani Ke Liye, Beh Gaya Sub Tera Khoon
Abb Koi Aas Nahi, Tou Mere Pass Nahi
Rassi Shanoon Main Bandhi, Tu Na Aya Ghazi

● Jab Chali Sheh Pe Churi, Aye Mere Sher e Jari
Hath Malti Thi Behan, Kuch Qadam Dur Khari
Kat Gaya Sheh Ka Gala, Haye Bhai Ne Sada
tujhKo Har Zarb Pe Di, Tu Na Aya Ghazi

● Qaid Khane Main Qaza, Jab Sakina Ko Mili
De Ke Kurtay Ka Kafan, Bacchi Dafnaye Gaye
Us Ghari Naam Tera, Surat e Naad e Ali
Bs Main Dohrati Rahi, Tu Na Aya Ghazi

● Roya Rehan Qalam, Kar Ky Yea Baat Rakam
Khoon Main Doob Gaya, Mere Ghazi Ka Alam
Zakhmi Zainab Ka Jigar, Khoon Fishan Shah Ka Sar
Aye Khaimon Main Shaqi, Tu Na Aya Ghazi
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जब रिदा सर से छीनी मैं सदा देती रही
तू ना आया ग़ाज़ी

आल-ए-इमरान कहां और ज़िन्दान कहां
ले बहन क़ैद हुई, तू ना आया ग़ाज़ी

● आ गई शाम-ए-आलम लुट गए अहल-ए-हरम
रेत पर जलती हुई हो गया ठंडा अलम
पुरसा देने के लिये मुझे से मिलने के लिये
आ गये बाबा अली, तू ना आया ग़ाज़ी

● धूप में तू था शजर तुझ से आबाद था घर
है बरहना मेरा सर क्या नहीं तुझ को खबर
ऐ आलमदार-ए-वफ़ा इस बहन को बा ख़ुदा
तुझसे ढारस थी बड़ी, तू ना आया ग़ाज़ी

● क्या कहूं शेर मेरा बे रिदा हम को लिए
ये मुसलमा सारे शहर दर शहर गए
खिलकत-ए-कूफा कभी खिलकत-ए-शाम कभी
बार हा हम पे हंसी, तू ना आया ग़ाज़ी

● कितनी बे बस थी बहन ऐ शहंशाह-ए-वफ़ा
नाम ले ले के मेरा जब ये ज़ालिम ने कहा
नाज़ था जिस पे तुझे अब बुलाओ ना उसे
और मैं रोती रही, तू ना आया ग़ाज़ी

● हम को पानी ना मिले तेरी खुशबू तो रहे
तेरे बाज़ू न कटें चाहे मशकीज़ा छिदे
ये मगर हो ना सका तेरे बाजु हैं जुदा
मुझ पे है तश्नलाबी, तू ना आया ग़ाज़ी

● क्या सकीना से कहूं ऐ मेरे दिल के सुकूँ
हाय पानी के लिये बह गया सब तेरा खूं
अब कोई आस नहीं तू मेरे पास नहीं
रस्सी शानों में बंधी, तू ना आया ग़ाज़ी

● जब चली शह पे छुरी ऐ मेरे शेर ए जरी
हाथ मलती थी बहन कुछ क़दम दूर खड़ी
कट गया शह का गला हाय भाई ने सदा
तुझको हर ज़र्ब पे दी, तू ना आया ग़ाज़ी

● कैद खाने में क़ज़ा जब सकीना को मिली
देके कुरते का कफन बच्ची दफ़नाई गई
उस घड़ी नाम तेरा सूरत-ए-नाद-ए-अली
बस मैं दौहराती रही, तू ना आया ग़ाज़ी

● रोया रेहान क़लम कर के ये बात रक़म
खून में डूब गया मेरे ग़ाज़ी का आलम
ज़ख्मी ज़ैनब का जिगर खून फिशां शाह का सर
आए खैमों में शकी, तू ना आया ग़ाज़ी

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